मदद और सहारा देने के तरीके
अक्सर आपको लगेगा कि आप अपने दोस्त या किसी प्रियजन की मदद के लिए तुरंत कुछ करें या उन्हें बचाएँ। लेकिन सबसे ज़रूरी है कि आप उनसे बातचीत शुरू करें और ध्यान से सुनें। भावनात्मक और व्यावहारिक — दोनों तरीक़ों से सहारा देने के कई रास्ते हो सकते हैं।
अक्सर आपको लगेगा कि आपको सब ठीक करना है। लेकिन सबसे ज़्यादा मददगार यह होता है कि आप अपने दोस्त या प्रियजन की बात ध्यान से सुनें और उनके फ़ैसलों का सम्मान करें। आपके पास हर जवाब होना ज़रूरी नहीं है। ज़रूरी यह है कि उन्हें लगे कि वे आप पर भरोसा कर सकते हैं। अगर आप कभी झिझकें या घबराएँ तो भी ठीक है। बस देखभाल से साथ रहना बहुत मायने रखता है।
हिंसा हमेशा ताक़त और क़ाबू (कंट्रोल) की बात होती है। अक्सर समाज और लोग हिंसा झेल रहे व्यक्ति को ही दोषी ठहराते हैं, बजाय इसके कि हिंसा करने वाले को जवाबदेह ठहराएँ। अपने दोस्त को बताइए कि आप उन पर विश्वास करते हैं और जब वे तैयार हों, आप उनके साथ रहेंगे। अगर वे तुरंत न भी बोलें, फिर भी आपका साथ उन्हें ताक़त देता है।
याद रखें, हिंसा जटिल होती है और इसे समझना आसान नहीं है। अपने दोस्त या प्रियजन से तुरंत फ़ैसले लेने की उम्मीद या दबाव मत डालिए। उन्हें बस यह याद दिलाइए कि उनकी सुरक्षा सबसे पहले है।
सबसे अहम है कि आप देखभाल, सम्मान और सब्र के साथ उनके साथ मौजूद रहें। आपका सहारा सचमुच बड़ा फ़र्क डाल सकता है।
हिंसा कई रूपों में हो सकती है — जैसे शब्दों से चोट पहुँचाना, भावनात्मक दबाव, पैसों पर क़ाबू, शारीरिक चोट, या यौन हिंसा। इसे पहचानना हमेशा आसान नहीं होता, और यह अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है। हर रिश्ता अलग होता है, लेकिन हिंसक पार्टनर आमतौर पर अलग-अलग तरीक़े अपनाते हैं ताकि वे हमेशा कंट्रोल और ताक़त बनाए रख सकें।
कई महिलाओं के लिए परिवार, समाज और पैसों का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि उनके पास रुकने के अलावा और कोई असली विकल्प नहीं दिखता। जब सुरक्षित घर, बच्चों की देखभाल, रोज़गार, पढ़ाई या स्वास्थ्य और देखभाल की मदद न मिले, तो रिश्ता छोड़ना आसान नहीं होता।