हिंसा हमेशा ताक़त और नियंत्रण से जुड़ी होती है। लेकिन अक्सर हमारा समाज abuser को ज़िम्मेदार ठहराने के बजाय हिंसा का सामना करने वाली महिला/व्यक्ति को ही दोषी ठहराता है। बहुत से लोग जिन्हें लगता है कि उनका रिश्ता abusive है, वे ख़ुद को दोष देने की परेशानी से भी गुज़रते हैं।
अक्सर बचपन से हमें सिखाया जाता है कि जलन, कंट्रोल करना या मनमानी को “प्यार” समझा जाए। इसी वजह से जब कोई समझता है कि उसका रिश्ता अस्वस्थ या हिंसक है, तो अपने आप को दोष देने लगता है। यह सामान्य है, लेकिन याद रखें — हिंसा आपकी गलती नहीं है। यह हमेशा उसी व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है जो चोट पहुँचा रहा है।
कभी-कभी हिंसा “दोनों तरफ़” जैसी लग सकती है। जैसे अगर आपका पार्टनर आपको कमरे में बंद कर दे और आप बाहर निकलने के लिए उसे धक्का दें, तो वह बाद में कह सकता है कि “तुम भी हिंसक हो।” लेकिन याद रखें: अपनी रक्षा करना हिंसा नहीं है। खुद को बचाना और किसी को चोट पहुँचाने के लिए चुनना — दोनों अलग बातें हैं।
हर रिश्ते में हिंसा अलग तरह से दिख सकती है। अगर नए रिश्ते में भी हिंसा हो, तो यह बहुत निराशाजनक और उलझन भरा लग सकता है। ऐसे में यह सोच आ सकती है कि “मैं प्यार या सम्मान के लायक़ नहीं हूँ।” लेकिन यह सच नहीं है। किसी और का आपको कंट्रोल करना या चोट पहुँचाना कभी भी आपकी गलती नहीं होती।
अक्सर लोग सोचते हैं, “क्यों मैंने पहले नहीं पहचाना?” या “क्यों पहले नहीं छोड़ दिया?” लेकिन याद रखें — हिंसा बहुत जटिल और संभालना मुश्किल होती है। जब कोई आपको अलग-थलग कर देता है, भावनात्मक रूप से तोड़ देता है, पैसों पर कंट्रोल कर लेता है या डराता-धमकाता है, तो हर चीज़ तुरंत पहचान पाना आसान नहीं होता।
कई बार परिवार, समाज और आर्थिक दबावों की वजह से औरतों के पास सुरक्षित विकल्प नहीं होते। अगर रहने की जगह, बच्चों की देखभाल, शिक्षा, काम या स्वास्थ्य का सहारा न हो, तो “छोड़ देना” इतना आसान नहीं होता। लेकिन याद रखें — हिंसा हमेशा हिंसक पार्टनर की पसंद होती है, और इसका दोष औरत को नहीं उठाना चाहिए।
अगर आपको शर्म, अपराधबोध या उलझन महसूस हो रही है, तो आप अकेली नहीं हैं। काउंसलिंग और सहयोग सेवाएँ उपलब्ध हैं। घरेलू हिंसा से जुड़ी संस्थाएँ और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ — जिनमें मुफ़्त या कम-खर्च वाली सेवाएँ भी शामिल हैं — आपकी मदद कर सकती हैं। सबसे ज़रूरी: आप प्यार, देखभाल और सम्मान की हक़दार हैं।