अगर आप पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सोच रही हैं, तो यह जानना ज़रूरी है

If you or someone you care about is experiencing abuse, involving the police might feel like an important step. Police action may be life-saving or help connect you to protection and support.

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क़ानून साथ होने के बावजूद, पुलिस से मदद लेना कई बार धीमा और मुश्किल लग सकता है। कभी-कभी इसमें डर, दबाव या पार्टनर की धमकियाँ और बदले की कोशिशें भी शामिल होती हैं। ऐसे में आपको लग सकता है कि शिकायत वापस ले लूँ, समझौता कर लूँ या चुप रहूँ। यह भी ठीक है — आपकी सुरक्षा सबसे पहले है। मदद लेना आप तभी करें जब आप तैयार और सुरक्षित महसूस करें।
यह सामान्य है कि आपको डर लगे, असमंजस हो या यह सोचें कि लोग आप पर यक़ीन नहीं करेंगे या आपको ग़लत समझेंगे। लेकिन याद रखिए, डर या ग़लत समझे जाने का डर, आपकी ग़लती मानने जैसा नहीं है।

अगर आप किसी दोस्त या अपने किसी करीबी के लिए चिंतित हैं, तो बिना दबाव डाले उनकी बात सुनें। हो सकता है वे अभी पुलिस को शामिल करने के लिए तैयार या सुरक्षित न हों। उनकी पसंद और सीमाओं का सम्मान करें। आपका भरोसा और सहारा उनके लिए बहुत मायने रखता है।

  • आपकी सुरक्षा सबसे ज़रूरी है। सिर्फ़ वही क़दम उठाएँ जिनसे आपको और ज़्यादा ख़तरा न हो। शिकायत करने पर पुलिस आपके घर आकर सवाल पूछ सकती है या सबूत इकट्ठा कर सकती है। सोचिए, इसका आपके लिए क्या मतलब होगा और क्या आप उसके लिए तैयार हैं।
  • आपका रिश्ता सिर्फ़ शादी का होना ज़रूरी नहीं है। अगर आप live-in या घरेलू रिश्ते में हैं, तब भी आप शिकायत दर्ज कर सकती हैं।
  • शिकायत दर्ज करने की कोई समय सीमा नहीं है। आप दिन, हफ़्तों या महीनों बाद भी रिपोर्ट कर सकती हैं। सबसे ज़रूरी है कि आप जब तैयार हों तभी आगे बढ़ें। हो सकता है आपसे पूछा जाए कि आपने पहले क्यों नहीं बताया, लेकिन अगर आप तैयार नहीं थीं तो यह भी बिल्कुल ठीक है।
  • क़ानूनी जानकारी या वकील होना ज़रूरी नहीं है। शिकायत बस वही है जो आपके साथ हुआ, आपकी अपनी ज़ुबान में बताना।
  • आप किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर सकती हैं। घरेलू या यौन हिंसा के मामलों में आप कहीं भी Zero FIR दर्ज करवा सकती हैं, चाहे हिंसा कहीं और हुई हो। पुलिस को आपकी शिकायत दर्ज करनी होती है और फिर सही थाने तक पहुँचाना होता है।
  • जो हुआ उसे बताने के लिए तैयार रहें। आपसे पूछा जा सकता है, “आज क्या हुआ?” बताइए कि आपके पार्टनर ने क्या किया और उससे आपको कैसे डर या असुरक्षा महसूस हुई। अगर आपको अपनी जान का डर है, तो साफ़-साफ़ कहें।
  • आपको काग़ज़ात या सबूत साथ ले जाना ज़रूरी नहीं है। अगर आपके पास फ़ोटो या संदेश जैसे सबूत हैं, तो आप दे सकती हैं, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है।
  • आपको अकेले जाने की ज़रूरत नहीं है। आप किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य या सहारे वाले को साथ ले जा सकती हैं। ज़रूरत पड़ने पर वे आपके behalf पर भी शिकायत कर सकते हैं। आप <resource> पर कॉल करके भी सहारा ले सकती हैं।
  • आपके पास सुरक्षित महसूस करने का हक़ है। आप चाहें तो अपनी शिकायत एक महिला पुलिस अधिकारी से दर्ज करने की माँग कर सकती हैं, ख़ासकर घरेलू या यौन हिंसा के मामलों में।
  • जितना हो सके शांत रहें। भावुक होना या रोना बिल्कुल ठीक है। बस कोशिश करें कि जो हुआ उसे साफ़ तरीके से बता सकें।
  • आपके पास “समझौता” करने से मना करने का पूरा हक़ है। हिंसा कोई “निजी” या “घर का मामला” नहीं है, यह एक गंभीर मुद्दा है, और पुलिस को आपकी शिकायत दर्ज करनी ही होगी।
  • साइन करने से पहले ध्यान से पढ़ें। यह सुनिश्चित करें कि शिकायत में वही लिखा है जो आपने कहा था। अगर आपको कुछ याद नहीं आ रहा, तो साफ़ कह दें।
  • अपनी शिकायत की एक मुफ़्त कॉपी ज़रूर लें। उस पर शिक़ायत नंबर और डेली डायरी नंबर के साथ मुहर और हस्ताक्षर होना चाहिए। यह आपका अधिकार है।
  • शिकायत दर्ज करने या FIR लिखने के लिए कोई फ़ीस नहीं देनी होती। आपको किसी को रिश्वत या पैसे देने की ज़रूरत नहीं है। अगर कोई पैसे माँगे तो आप बड़े अफ़सर को बता सकती हैं या हेल्पलाइन से सहारा ले सकती हैं।

उम्मीद रखें कि पुलिस फ़ॉलो-अप करेगी। वे आपके घर आ सकते हैं या FIR दर्ज करने से पहले और सवाल पूछ सकते हैं, या आपका मामला Crime Against Women (CAW) सेल को भेज सकते हैं।

  • FIR दर्ज होना: अगर पुलिस को लगे कि आगे बढ़ना ज़रूरी है, तो वे आपके बयान के आधार पर FIR दर्ज करेंगे। यही क़ानूनी प्रक्रिया की शुरुआत होती है। वकील आपकी स्थिति के अनुसार आपके अधिकार और विकल्प समझने में मदद कर सकते हैं।

 

अदालती प्रक्रिया: मामला कोर्ट तक जा सकता है — आपराधिक (criminal) या सिविल (civil) केस के रूप में, यह स्थिति पर निर्भर करता है।

  • “आपने पहले रिपोर्ट क्यों नहीं किया?”
  • “क्या आपके पास कोई सबूत है?”
  • “क्या तुम दोनों आपस में बात करके हल नहीं निकाल सकतीं?”
  • “तुमने पहले ही क्यों नहीं छोड़ा?”

 

आप चाहें तो इन सवालों का जवाब न दें। ऐसे सवाल आपको ग़लत ठहराने या नज़रअंदाज़ करने जैसे लग सकते हैं, लेकिन आपका अनुभव सच और सही है — चाहे आप कब भी बोलें या आपके पास सबूत हों या न हों।
हिंसा कभी आपकी ग़लती नहीं है। आपके पास सुरक्षा और सहारे का पूरा हक़ है।