घरेलू हिंसा, खासकर अंतरंग साथी द्वारा की गई हिंसा (Intimate Partner Violence – IPV), सिर्फ़ “घर की बात” नहीं है। यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और लाखों महिलाओं के लिए समानता, सुरक्षा और सम्मान की राह में रुकावट है। भारत में बहुत कम महिलाएँ मदद मांगती हैं। लगभग 13% महिलाएँ ही किसी से मदद लेती हैं, और 1% से भी कम महिलाएँ पुलिस, अस्पताल या कानूनी सेवाओं जैसी औपचारिक जगहों पर जाती हैं। ज़्यादातर महिलाएँ दोस्तों, परिवार या पड़ोसियों से बात करना पसंद करती हैं — और अक्सर तभी औपचारिक मदद लेती हैं जब हिंसा असहनीय या जानलेवा हो जाती है।
अधिक जानकारी के लिए आप faithgonsalves.firststep@gmail.com पर लिख सकते हैं।
ये शब्द वेबसाइट पर बार-बार आएँगे। ये हिंसा, मदद और रिश्तों से जुड़े महत्वपूर्ण शब्द हैं जिन्हें समझना ज़रूरी है।
Survivor (सर्वाइवर) – वह व्यक्ति जिसने हिंसा या शोषण झेला है और अब भी उससे जूझ रहा है या आगे बढ़ चुका है।
Intimate Partner Violence (अंतरंग साथी द्वारा हिंसा) – किसी रिश्ते या शादी में किया गया कोई भी शारीरिक, यौन, आर्थिक या मानसिक नुकसान, या किसी को नियंत्रित करने वाला व्यवहार।
Help-seeking (मदद माँगना) – जब कोई व्यक्ति दोस्तों, परिवार, पुलिस, अस्पताल या किसी अन्य सेवा से सहायता मांगता है।
Disclosure (खुलकर बताना) – जब कोई सर्वाइवर अपने अनुभव किसी भरोसेमंद व्यक्ति या संस्था से साझा करता है।
Informal Supporters (अनौपचारिक मददगार) – दोस्त, परिवार, पड़ोसी या सहकर्मी जो सबसे पहले किसी हिंसा की बात सुन सकते हैं।
Formal Support Services (औपचारिक सहायता सेवाएँ) – पुलिस, अस्पताल, कानूनी सहायता, शेल्टर, या हेल्पलाइन जैसी संस्थाएँ जो औपचारिक रूप से सहायता देती हैं।
Patriarchal Norms (पितृसत्तात्मक सोच) – समाज के वे नियम जो पुरुषों को महिलाओं से ज़्यादा अधिकार और नियंत्रण देते हैं।
Power and Control (सत्ता और नियंत्रण) – हिंसा का मुख्य कारण, जहाँ एक साथी डर, पैसे, या धमकी से दूसरे पर काबू रखने की कोशिश करता है।
Trauma-informed (ट्रॉमा के प्रति संवेदनशील) – ऐसी सोच या काम करने का तरीका जो यह समझे कि किसी ने हिंसा या दर्द का अनुभव किया है, और उसकी गरिमा व सुरक्षा का ध्यान रखे।
Co-design (साझा रूप से बनाना) – जब समाधान सीधे प्रभावित लोगों के साथ मिलकर तैयार किए जाते हैं।
Safety Planning (सुरक्षा की योजना) – अपने लिए एक सुरक्षित और व्यावहारिक योजना बनाना ताकि संकट में तुरंत कदम उठाए जा सकें।
Decision-making Process (निर्णय लेने की प्रक्रिया) – सर्वाइवर द्वारा समय-समय पर किए गए फैसले जैसे रहना, जाना, या मदद लेना।
Collective Care (सामूहिक देखभाल) – जब समुदाय एक-दूसरे की सुरक्षा और भलाई की ज़िम्मेदारी साझा करता है।
Digital Abuse (डिजिटल हिंसा) – फोन, इंटरनेट या सोशल मीडिया के ज़रिए किसी को डराना, धमकाना या नियंत्रित करना।
अंतरंग साथी द्वारा हिंसा (Intimate Partner Violence – IPV) का मतलब है किसी मौजूदा या पुराने रिश्ते में ऐसा व्यवहार जो शारीरिक, यौन या मानसिक नुकसान पहुँचाए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization – WHO) के अनुसार, इसमें शारीरिक मारपीट, ज़बरदस्ती यौन संबंध, भावनात्मक शोषण, और नियंत्रण करने वाले व्यवहार शामिल हैं — जैसे किसी को दोस्तों से अलग करना या पैसों तक पहुँच रोकना।
दुनिया भर में लगभग हर तीन में से एक महिला अपने जीवन में किसी न किसी रूप में IPV का अनुभव करती है। भारत में भी लगभग हर तीन में से एक महिला घरेलू हिंसा झेलती है।
यह हिंसा न केवल चोट या मृत्यु का कारण बन सकती है, बल्कि अवसाद, आत्महत्या के विचार, गर्भावस्था की जटिलताएँ, और HIV जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ाती है। पिछले 30 वर्षों में शोध से यह भी सामने आया है कि यह हिंसा गरीब, प्रवासी और अल्पसंख्यक महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित करती है।
पहला कदम एक गुणात्मक शोध (qualitative research) और कहानी-आधारित प्रोजेक्ट है, जिसे Faith Gonsalves ने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की 2024–2025 जेफ़्री रिचर्डसन फैलोशिप के तहत विकसित किया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि दिल्ली में हिंसा झेल चुकी महिलाएँ अपनी बात कैसे साझा करती हैं और मदद कैसे माँगती हैं।
यह प्रोजेक्ट सर्वाइवर्स, नारीवादी संगठनों और सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर बनाया गया ताकि:
समुदाय की भागीदारी पर ज़ोर देते हुए, पहला कदम ने सह-डिज़ाइन (co-design) विधियाँ अपनाईं ताकि सर्वाइवर्स की आवाज़ और अनुभव प्रोजेक्ट के केंद्र में रहें।
यह वेबसाइट द्विभाषी (अंग्रेज़ी और हिंदी) डिजिटल संसाधन है जिसमें चित्र-आधारित वीडियो, सुरक्षा योजना गाइड, और इंटरैक्टिव उपकरण शामिल हैं जो महिलाओं की वास्तविक ज़िंदगी के अनुभवों पर आधारित हैं।
पहला कदम उन सभी के लिए बनाया गया है जो अंतरंग साथी द्वारा हिंसा (IPV) से प्रभावित हैं, या जो ऐसे लोगों के पहले सहारा बनते हैं। इसमें वे महिलाएँ शामिल हैं जो किसी रिश्ते या शादी में हिंसा झेल रही हैं, साथ ही उनके दोस्त, परिवार, पड़ोसी, सहकर्मी या समुदाय के सदस्य जो मदद करना चाहते हैं।
यह संसाधन शिक्षकों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और सेवा प्रदाताओं के लिए भी उपयोगी है, जो सर्वाइवर्स से जुड़ी जानकारी और कहानियों को अपने काम में शामिल करना चाहते हैं।
द्विभाषी सामग्री, व्यावहारिक गाइड और सह-डिज़ाइन की गई कहानियों के ज़रिए, पहला कदम महिलाओं, मददगारों और पेशेवरों — सभी को जोड़ने की कोशिश करता है ताकि हर कोई हिंसा को पहचान सके और सही मदद दे सके।
पहला कदम कोई आपातकालीन सेवा नहीं है और यह सीधे संकट के समय सहायता नहीं दे सकता। अगर आप तुरंत ख़तरे में हैं, तो कृपया पुलिस, आपातकालीन हेल्पलाइन या संसाधन पेज पर सूचीबद्ध स्थानीय सेवाओं से संपर्क करें।
पहला कदम आपको सर्वाइवर-केंद्रित कहानियाँ, सुरक्षा योजना उपकरण और अधिकारों व विकल्पों पर जानकारी प्रदान करता है — ताकि महिलाएँ और उनके सहयोगी हिंसा को बेहतर समझ सकें और अगले कदम सुरक्षित रूप से तय कर सकें।
यह एक सहायक संसाधन है — जो जागरूकता और तैयारी बढ़ाने में मदद करता है, न कि आपातकालीन सहायता को बदलने के लिए।
पहला कदम को आप अपनी गति से इस्तेमाल कर सकते हैं। अंतरंग साथी द्वारा हिंसा (IPV) का सामना कर रही महिलाएँ इसे तब देख सकती हैं जब वे अपने अनुभवों को समझना चाहती हैं, अपने अधिकारों के बारे में जानना चाहती हैं, या सुरक्षित मदद के विकल्प तलाश रही हैं।
आपको तुरंत कोई निर्णय लेने की ज़रूरत नहीं है — केवल जानकारी हासिल करना और अपने विकल्पों को जानना भी एक सशक्त शुरुआत हो सकती है।
दोस्तों, परिवार या समुदाय के सदस्यों के लिए, यह संसाधन यह समझने में मदद करता है कि किसी को कैसे सहानुभूति और देखभाल के साथ प्रतिक्रिया दें अगर वे हिंसा के बारे में बताएं।
यह साइट आपातकालीन सेवाओं का विकल्प नहीं है, लेकिन यह द्विभाषी (अंग्रेज़ी और हिंदी) कहानियाँ, उपकरण और गाइड प्रदान करती है जो सर्वाइवरों के अनुभवों से प्रेरित हैं और सुरक्षित निर्णय लेने में मदद करते हैं।
भारत में ज़्यादातर महिलाएँ जो अंतरंग साथी द्वारा हिंसा (IPV) का सामना करती हैं, पुलिस, अस्पताल या कानूनी सहायता जैसी औपचारिक सेवाओं तक नहीं पहुँचतीं। वे पहले दोस्तों, परिवार या पड़ोसियों से बात करती हैं — और अक्सर तभी औपचारिक मदद लेती हैं जब हिंसा बहुत गंभीर या जानलेवा हो जाती है।
जब तक मदद ली जाती है, तब तक जोखिम और नुकसान अक्सर बहुत बढ़ चुके होते हैं।
जल्दी मदद माँगने का मतलब है — हिंसक या नियंत्रित व्यवहार को समय रहते पहचानना, संकट से पहले विकल्पों के बारे में सोचना और भरोसेमंद लोगों से संपर्क करना। जल्दी मदद लेना अलगाव को कम कर सकता है, सुरक्षा बढ़ा सकता है और हिंसा को बढ़ने से रोक सकता है।
यह समुदाय को भी तैयार करता है — ताकि दोस्त, परिवार, सहकर्मी या पड़ोसी जो सबसे पहले किसी की बात सुन सकते हैं, वे सही जानकारी और संवेदना के साथ प्रतिक्रिया दे सकें। ऐसे समाज में, जहाँ औपचारिक प्रणालियों पर भरोसा करना कठिन है, यह और भी ज़रूरी हो जाता है।
ज़्यादातर संसाधन केवल कानूनों या सेवाओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन पहला कदम सर्वाइवर्स के साथ मिलकर बनाया गया है। यह दिल्ली में किए गए गुणात्मक शोध (qualitative research) और सह-डिज़ाइन (co-design) तरीकों पर आधारित है।
यह महिलाओं की वास्तविक ज़िंदगी के अनुभवों को दर्शाता है — खासकर उन महिलाओं के जो अक्सर पहले दोस्तों, परिवार या पड़ोसियों से मदद माँगती हैं।
यह संसाधन द्विभाषी (अंग्रेज़ी और हिंदी) है, जिसमें कहानी-कथन (storytelling) और व्यावहारिक गाइड दोनों शामिल हैं। यह सिर्फ़ कानून या सेवाओं की सूची नहीं है, बल्कि समझ, सहानुभूति और सुरक्षित निर्णय लेने को बढ़ावा देने वाला उपकरण है।
पहला कदम इस विचार पर आधारित है कि जब कोई महिला अपने अनुभव को साझा करती है और सामने वाला व्यक्ति देखभाल और सहानुभूति से प्रतिक्रिया देता है, तो इससे मानसिक और शारीरिक नुकसान कम हो सकता है — जैसे अवसाद, आत्महत्या के विचार या पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)।
ऐसी सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ भविष्य की हिंसा से बचाव में भी मदद कर सकती हैं। वहीं, नकारात्मक या उपेक्षापूर्ण प्रतिक्रियाएँ सर्वाइवर की मानसिक स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं।
इसलिए, यह अध्ययन यह समझने के लिए किया गया कि महिलाएँ हिंसा के शुरुआती दौर में मदद कैसे तलाशती हैं, वे अपने अनुभवों को कैसे पहचानती हैं, और किन लोगों या संस्थाओं से संपर्क करती हैं — चाहे अनौपचारिक रूप से दोस्तों या परिवार से, या औपचारिक रूप से पेशेवरों और सेवाओं से।
यहीं से मिले अनुभवों और सीखों ने इस संसाधन की सामग्री और ढाँचे को आकार दिया।
यह अध्ययन Faith Dharma Gonsalves द्वारा हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की जेफ़्री रिचर्डसन फैलोशिप के तहत किया गया था।
इसमें दिल्ली की तीन संस्थाओं — शक्ति शालिनी, Ideal Youth for Revolutionary Change (IYRC), और The YP Foundation — के साथ साझेदारी की गई।
शक्ति शालिनी और IYRC के साथ नैतिक समीक्षा और अनुमोदन के अलावा, इस अध्ययन को स्वतंत्र Monk Prayogshala Institutional Review Board से भी नैतिक स्वीकृति मिली (FWA00029694; IRB No. IRB00012595; EC/NEW/INST/2024/4473)।
पहला कदम को सह-डिज़ाइन (co-design) दृष्टिकोण से बनाया गया — यानी समाधान समुदाय के साथ मिलकर तैयार किए गए, न कि उनके लिए।
इस प्रक्रिया में हिंसा झेल चुकी महिलाओं ने सहयोगी की भूमिका निभाई, ताकि संसाधन वास्तविक, सम्मानजनक और उनके अनुभवों से जुड़ा हो।
प्रोजेक्ट में ट्रॉमा-संवेदनशील (trauma-informed) डिज़ाइन, सेवा-मानचित्रण (service mapping) और नारीवादी (feminist) सुविधा तकनीकों का इस्तेमाल किया गया ताकि हर सामग्री सुलभ, गरिमामय और सर्वाइवर-केंद्रित हो।
इन अंतर्दृष्टियों से इस वेबसाइट का निर्माण हुआ — जिसमें चित्र-आधारित वीडियो, कानूनी और सुरक्षा योजना गाइड, और ऐसे इंटरएक्टिव उपकरण हैं जो लोगों को सुरक्षित निर्णय लेने और देखभाल से जुड़ने में मदद करते हैं।
भारत में, इतनी गंभीर समस्या होने के बावजूद बहुत कम महिलाएँ मदद लेती हैं। केवल लगभग 13% महिलाएँ किसी भी तरह की सहायता लेती हैं, और 1% से भी कम महिलाएँ औपचारिक सेवाओं — जैसे स्वास्थ्य सेवा, पुलिस या कानूनी सहायता — से संपर्क करती हैं।
ज़्यादातर महिलाएँ दोस्तों, परिवार या पड़ोसियों से बात करना पसंद करती हैं। आमतौर पर तभी औपचारिक मदद ली जाती है जब हिंसा असहनीय हो जाए या आत्महत्या जैसी स्थिति बन जाए।
हालाँकि आर्थिक स्वतंत्रता, कानूनों की मौजूदगी और कानूनी सहायता तक पहुँच महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं। गहराई से जमी पितृसत्तात्मक सोच और पुरुष अधिकार की भावना यह तय करती है कि लोग हिंसा को कैसे देखते हैं, महिलाएँ इसे कैसे पहचानती हैं, और समाज उनकी बात पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
यहाँ शिक्षा की भूमिका अहम है — परिवार, दोस्तों और समुदाय को यह सिखाने में कि हिंसा को पहचानना और समर्थन देना कितना ज़रूरी है।
हिंसा की रोकथाम से जुड़ी कुछ मुख्य सीखें:
पहला, हिंसा की रोकथाम केवल यह बताने से ज़्यादा है कि हिंसा के प्रकार क्या हैं। यह ज़रूरी है कि हम यह समझें कि कैसे कई बार नुकसान पहुँचाने वाले या नियंत्रित करने वाले व्यवहार “प्यार” या “देखभाल” के रूप में सामान्य बना दिए जाते हैं। इससे लोग उन्हें हिंसा के रूप में पहचान नहीं पाते और मदद नहीं लेते।
दूसरा, शादी को अक्सर एक नई शुरुआत माना जाता है, लेकिन बहुत कम बात होती है कि यह महिलाओं की स्वतंत्रता, पसंद और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को कैसे बदलती है। कई महिलाएँ शादी के बाद आर्थिक, शारीरिक और यौन हिंसा के जोखिम में आ जाती हैं। शादी से पहले उम्मीदों पर खुलकर बातचीत करना — जैसे पढ़ाई या काम जारी रखना, परिवार से जुड़े रहना, बच्चों को लेकर फैसले लेना — रिश्ते को ज़्यादा बराबरी वाला बना सकता है।
तीसरा, हिंसा की रोकथाम केवल सर्वाइवर की ज़िम्मेदारी नहीं है। पितृसत्तात्मक सोच हमें यह सिखाती है कि हिंसा “सामान्य” है और दखल देना “गलत”। असली रोकथाम यह सिखाना है कि हम हिंसा को देखकर चुप न रहें। किसी को सहारा देना कभी आसान तो कभी बहुत कठिन होता है — इसमें भावनात्मक सहयोग, कानूनी या आर्थिक मदद, या बस साथ बने रहना शामिल हो सकता है।
सहानुभूति, ट्रॉमा की समझ और सामूहिक देखभाल की भावना इस दिशा में बेहद ज़रूरी हैं।
जल्दी मदद लेने से जुड़ी सीखें:
पहला, सेवाओं की जानकारी की भारी कमी है। कई हेल्पलाइन या शेल्टर मौजूद हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को इनके बारे में पता है, ख़ासकर क्षेत्रीय भाषाओं में।
दूसरा, ट्रॉमा-संवेदनशील (trauma-informed) नज़रिया अपनाने का मतलब है यह समझना कि “छोड़ देना” हमेशा एकमात्र समाधान नहीं होता। कई सर्वाइवर्स कहती हैं, “छोड़ना बस शुरुआत है।”
शादी या रिश्ते से निकलना या पुलिस में शिकायत करना सबसे जोखिम भरा समय हो सकता है। इसलिए सुरक्षित तरीक़े से बाहर निकलने की योजना बनाना समय और तैयारी माँगता है। यह जानना ज़रूरी है कि हर सर्वाइवर की यात्रा अलग होती है — किसी के लिए इसका मतलब धीरे-धीरे कदम उठाना है, तो किसी के लिए सुरक्षा की योजना बनाना या भरोसेमंद लोगों से संपर्क रखना।
तीसरा, जब औपचारिक संस्थाएँ — जैसे पुलिस या कानूनी सेवाएँ — असुरक्षित या अप्रभावी लगती हैं, और महिलाएँ ज़्यादातर अनौपचारिक सहायता पर भरोसा करती हैं, तब हमें परिवार और समुदाय की भूमिका नए सिरे से सोचना होगी। ऐसे हस्तक्षेप जो दोस्तों, परिवार या समुदाय को संवेदनशील, देखभालपूर्ण और भरोसेमंद बनाते हैं, सबसे असरदार हो सकते हैं।
हाँ। पहला कदम प्रोजेक्ट, 2024–2025 की जेफ़्री रिचर्डसन फैलोशिप (हार्वर्ड मेडिकल स्कूल) के तहत किए गए एक गुणात्मक शोध (qualitative research) का हिस्सा है। पारदर्शिता और सीख साझा करने के लिए, शोध का संक्षिप्त सार रिपोर्ट (synthesis report) और कुछ शोध उपकरण जैसे साक्षात्कार व सह-डिज़ाइन गाइड अनुरोध पर साझा किए जाएँगे।
अगर आप इन दस्तावेज़ों को देखना चाहते हैं, तो कृपया faithgonsalves.firststep@gmail.com पर लिखें। ये सामग्री शोधकर्ताओं, शिक्षकों, पत्रकारों और उन पेशेवरों के लिए हैं जो हिंसा की रोकथाम में भागीदारी-आधारित (participatory), ट्रॉमा-संवेदनशील (trauma-informed), और नारीवादी (feminist) दृष्टिकोण अपनाना चाहते हैं।
सभी प्रतिभागियों की निजता की सुरक्षा के लिए संवेदनशील जानकारी और पहचान से जुड़ी जानकारी हटा दी गई है। साझा की गई सामग्री का उद्देश्य है कि अन्य लोग इस प्रोजेक्ट के तरीक़ों और सीखों पर आगे काम कर सकें।
हालाँकि पहला कदम महिलाओं के अनुभवों पर केंद्रित है, लेकिन अंतरंग साथी द्वारा हिंसा (IPV) पुरुषों और अन्य लिंगों को भी प्रभावित करती है। उनके अनुभव भी जटिल हैं और अभी भी शोध व सेवाओं में बहुत कम प्रतिनिधित्व पाते हैं।
हालाँकि, महिलाओं पर हिंसा का असर कहीं अधिक गंभीर होता है — वे अपने पुरुष साथियों से होने वाली गंभीर चोटों, नियंत्रण और हिंसक व्यवहार के मामलों में ज़्यादा जोखिम में रहती हैं।
इसीलिए, पहला कदम ने अपना ध्यान महिलाओं के शुरुआती मदद माँगने से जुड़े अनुभवों पर केंद्रित किया, ताकि उनके लिए सशक्तिकरण और सुरक्षा को बढ़ावा देने वाले संसाधन बनाए जा सकें।
पहला कदम कोई विस्तृत निर्देशिका नहीं है और यह कानूनी, चिकित्सा या परामर्श सेवाओं का विकल्प नहीं है। यह अधिकारों, सुरक्षा और सहायता के विकल्पों पर जानकारी साझा करता है, लेकिन यह भारत की हर महिला के अनुभव या ज़रूरतों को पूरी तरह नहीं दर्शा सकता।
सेवाओं की उपलब्धता आपके स्थान, भाषा और स्थानीय संसाधनों पर निर्भर करती है, और कई बार औपचारिक प्रणालियाँ — जैसे पुलिस, स्वास्थ्य सेवा या कानूनी सहायता — तक पहुँचना कठिन या असुरक्षित होता है।
यह संसाधन मुख्य रूप से दिल्ली-आधारित सेवाओं और नेटवर्क पर केंद्रित है, इसलिए इसमें दी गई कुछ जानकारी भारत के अन्य हिस्सों पर सीधे लागू नहीं हो सकती।
इसके अलावा, यह एक पायलट प्रोजेक्ट और अन्वेषणात्मक अध्ययन (exploratory study) है, इसलिए इसकी अंतर्दृष्टियाँ सीमित संख्या में सर्वाइवर्स और सेवा प्रदाताओं के अनुभवों पर आधारित हैं।
फिर भी, पहला कदम एक महत्वपूर्ण शुरुआत है — यह जागरूकता बढ़ाता है, सर्वाइवर-केंद्रित उपकरण प्रदान करता है, और सुरक्षित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मज़बूत बनाता है।