जब कोई अपने ग़ुस्से को “प्यार” कहे, या अपने कंट्रोल को “परवाह” कहे — तो यह स्नेह नहीं है, यह हिंसा है।
गैसलाइटिंग एक अंग्रेज़ी शब्द है जो अब ज़्यादा इस्तेमाल होने लगा है। यह मानसिक रूप से मनोवैज्ञानिक दबाव या हिंसा का एक तरीका है, जिसमें आपको अपने फैसलों पर शक होने लगता है, अपने निर्णयों पर भरोसा कम हो जाता है और हक़ीक़त पर सवाल उठने लगते हैं।
समय के साथ यह आपके आत्मविश्वास और अपने दिल की बात समझने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।
सच्चा प्यार और परवाह कभी आपको उलझन या डर का एहसास नहीं कराते।
गैसलाइटिंग क्या है? गैसलाइटिंग एक शब्द है जिसका इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ करते हैं। इसका मतलब है जब कोई पार्टनर आपकी बातों या अनुभवों को तोड़-मरोड़कर आपके ही ख़िलाफ़ इस्तेमाल करता है, ताकि आपको अपनी ही हक़ीक़त पर शक होने लगे।
यह भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक हिंसा का एक रूप है। समय के साथ, ऐसा पार्टनर आपके आत्मविश्वास और अपने ऊपर भरोसा करने की क्षमता को तोड़ देता है। इससे आप और असुरक्षित हो जाती हैं और रिश्ते को छोड़ना और भी मुश्किल लग सकता है।
गैसलाइटिंग कई तरीक़ों से सामने आ सकती है। उदाहरण के लिए, आपका पार्टनर यह जताए कि उसे आपकी कोई बात समझ नहीं आई या याद नहीं है, आपकी बात सुनने से इनकार करे, किसी घटना की आपकी याददाश्त पर सवाल उठाए या उसे छोटा दिखाए, या आपकी भावनाओं और ज़रूरतों को महत्वहीन बना दे।
वह आपसे कुछ इस तरह की बातें कह सकता है:
गैसलाइटिंग अक्सर धीरे-धीरे रिश्ते में बढ़ती है। शुरुआत में यह मामूली लग सकती है, लेकिन समय के साथ यह पैटर्न आपको उलझन, अकेलापन या उदासी की ओर धकेल सकता है।
आप गैसलाइटिंग का सामना कर रही हों, अगर आपको अक्सर ऐसा लगे:
याद रखें: यह आपकी गलती नहीं है। गैसलाइटिंग आपके अपने विचारों और भावनाओं पर भरोसा करना कठिन बना सकती है — लेकिन जो आप महसूस कर रही हैं, वह सच है।
संकेतों को पहचानना ही अपनी आवाज़ वापस पाने और आत्मविश्वास फिर से बनाने की पहली सीढ़ी है।