हिंसक रिश्ते से निकलते समय सुरक्षा की योजना

अस्वस्थ या हिंसक रिश्ते को छोड़ना ख़तरनाक हो सकता है। यह एक प्रक्रिया है, कोई एक क़दम नहीं। जब कोई हिंसक पार्टनर अपने क़ाबू के कमज़ोर होने का आभास करता है, तो हिंसा बढ़ सकती है। पहले से योजना बनाने से जोखिम कम हो सकते हैं और आपात स्थिति में आपके पास ज़्यादा विकल्प हो सकते हैं। इसे सुरक्षा योजना कहा जाता है। नीचे दिए गए हिस्से आपको ऐसे क़दमों से गुज़रने में मदद करेंगे, जैसे ज़रूरी सामान तैयार रखना, सहारा कहाँ से मिलेगा, और कहाँ जाना है इसकी योजना बनाना।

अपनी सुरक्षा योजना लिख लेना या रिकॉर्ड करना मददगार हो सकता है, लेकिन केवल तभी जब कॉपी सुरक्षित रखना मुमकिन हो। अगर ऐसा करना सुरक्षित न लगे, तब भी आप अपने विकल्पों के बारे में सोच सकती हैं। आप इस टूल का इस्तेमाल अपने दम पर कर सकती हैं या किसी भरोसेमंद इंसान के साथ। आप [xxxxx] पर हेल्पलाइन या काउंसलर से भी बात कर सकती हैं, जो सुरक्षा योजनाएँ बनाने में मदद करने का अनुभव रखते हैं।

  • मैं कहाँ रहूँगी: मैं ____________________ जा सकती हूँ (जैसे किसी भरोसेमंद व्यक्ति का घर, कोई संस्था, या सरकारी शेल्टर / सुरक्षित जगह)। मैं इन जगहों के पते सुरक्षित जगह पर लिखकर रखूँगी। मैं किसी भरोसेमंद इंसान से यह भी पूछ सकती हूँ कि शेल्टर होम में दाख़िले की प्रक्रिया क्या है।
  • मैं वहाँ कैसे पहुँचूँगी: मैं ____________________ से जाऊँगी। (दिल्ली में महिलाओं के लिए बसें मुफ़्त हैं। कुछ NGO परिवहन का ख़र्च उठाने में मदद कर सकते हैं।)

  • पैसे: अगर संभव हो तो मैं थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करना शुरू कर सकती हूँ। (जैसे बैंक अकाउंट खोलना, नक़द छुपाना, या अन्य सुरक्षित तरीक़े)।

  • आपातकालीन बैग: मैं ज़रूरी सामान एक सुरक्षित जगह पर पैक करके रख सकती हूँ, जैसे:
    • पहचान पत्र (आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक कागज़ात, पासपोर्ट)
    • क़ानूनी दस्तावेज़ (सुरक्षा आदेश, घर से जुड़े कागज़, तलाक़ या कस्टडी के कागज़, हेल्थ इंश्योरेंस)
    • दवाइयाँ और प्रिस्क्रिप्शन
    • अतिरिक्त कपड़े, चाबी, फ़ोन चार्जर, नक़द
    • फ़ोटो या अन्य यादगार सामान
    • बच्चों के लिए खिलौने या ज़रूरी चीज़ें

आप अपनी स्थिति सबसे अच्छी तरह जानती हैं। वही विकल्प चुनें जो आपको सुरक्षित और संभव लगें। अगर योजना के अनुसार सब न हो पाए, तो बैकअप विकल्पों के बारे में सोचें।

  • जाने का सबसे सुरक्षित समय कब है? (अपने पार्टनर के बर्ताव पर ध्यान दें।)
  • मैं कहाँ जाऊँगी, और कैसे पहुँचूँगी?
  • वे कौन लोग हैं जिन पर मैं भरोसा करती हूँ और जो मेरी मदद कर सकते हैं?
  • अपने पार्टनर को मत बताएँ कि आप जाने की सोच रही हैं। कोशिश करें जब वे घर पर न हों तब जाएँ।
  • अगर उनके घर पर होने पर जाना पड़े, तो कोई विश्वसनीय बहाना सोचें।
  • अगर उसी जगह से निकलना हो जहाँ पार्टनर मौजूद हो, तो सार्वजनिक जगह चुनें और कोशिश करें कोई भरोसेमंद इंसान आसपास हो।

अगर आप किसी अस्थायी जगह जैसे शेल्टर या किसी दोस्त/परिवार के घर जाएँ, तो सोचें:

  • क्या मुझे अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने की ज़रूरत है अगर मेरा पूर्व-पार्टनर मुझे ढूँढने की कोशिश करे? (जैसे अपना पता छुपाना, भरोसेमंद लोगों से कह देना कि वे साझा न करें, नया फ़ोन लेना, डिजिटल प्राइवेसी सुरक्षित करना)।
  • मैं अपनी रोज़मर्रा की जगहें (जैसे काम या स्कूल) कैसे सुरक्षित बना सकती हूँ? (जैसे सहकर्मियों से कह देना कि वे ध्यान रखें, सफ़र का रास्ता बदलना, फ़ोन में आपातकालीन नंबर सेव करना)।
  • क्या मैं अवांछित बर्ताव का रिकॉर्ड रख सकती हूँ? (तारीख, समय और घटनाएँ लिखना, धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट या ऑडियो सेव करना। ये सब क़ानूनी मदद में काम आ सकते हैं)।

हिंसक पार्टनर अक्सर टेक्नॉलजी का इस्तेमाल निगरानी के लिए करते हैं। आप इन तरीक़ों से डिजिटल सुरक्षा बढ़ा सकती हैं:

  • फ़ोन, ईमेल और सोशल मीडिया के पासवर्ड नियमित रूप से बदलना
  • प्राइवेसी सेटिंग्स अपडेट करना और ऐप्स में लोकेशन, कैमरा और माइक्रोफ़ोन बंद करना
  • जहाँ संभव हो टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन इस्तेमाल करना
  • सोशल मीडिया पर अनजान रिक्वेस्ट स्वीकार न करना
  • दोस्तों से कहना कि वे फ़ोटो या पोस्ट में टैग न करें, और किसी भी धमकी या अजीब गतिविधि के बारे में तुरंत बताएं
  • किसी भरोसेमंद प्रोवाइडर से फ़ोन या कंप्यूटर की जाँच करवाना ताकि स्पाईवेयर, की-लॉगिंग या ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर हटाया जा सके
  • नया फ़ोन और सिम कार्ड लेने पर विचार करना, जिसका कभी आपके पूर्व-पार्टनर को पता न रहा हो