हिंसक रिश्ते में सुरक्षा योजना

घर या पार्टनर को छोड़ना हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए यह सोचना ज़रूरी है कि जब आपका पार्टनर हिंसक हो, तो आप खुद को जितना हो सके सुरक्षित कैसे रख सकती हैं। इसे सुरक्षा योजना कहते हैं। नीचे दिए गए हिस्से आपको एक सरल सुरक्षा योजना बनाने में मदद करेंगे — इसमें बच्चों के साथ सुरक्षा की योजना बनाना, हिंसक घटना के दौरान क्या करना है, और घटना के बाद कैसे सुरक्षित रहना है शामिल है। सुरक्षा योजना एक प्रक्रिया है, और जैसे-जैसे आपकी स्थिति बदलती है, आपको इन सवालों पर दोबारा सोचने की ज़रूरत पड़ सकती है। वे विचार चुनें जो आपके लिए सबसे उपयोगी हों। आप यह अपने दम पर कर सकती हैं या किसी भरोसेमंद इंसान के साथ मिलकर भी कर सकती हैं।

हाँ। यह आप पर निर्भर करता है कि आपके लिए सुरक्षा कैसी दिखती है। चाहे आप हिंसक रिश्ते या पार्टनर के साथ रहना चुनें या छोड़ना, आप ऐसे कदम उठा सकती हैं जिनसे आप और आपके बच्चे या परिवार सुरक्षित रह सकें।

याद रखिए, आप खुद अपनी सबसे बड़ी सहारा हैं। आप पहचान सकती हैं कि आपका पार्टनर कब हिंसक हो सकता है, और आप यह सोचना शुरू कर सकती हैं कि सुरक्षित कैसे रहना है, कौन लोग मदद कर सकते हैं, और इमरजेंसी में क्या करना है।

एक अच्छी सुरक्षा योजना बदलती परिस्थितियों के साथ ढल जाती है और मानती है कि खतरे समय के साथ बदल सकते हैं।

इसमें सिर्फ शारीरिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान भी रखा जाता है। इसमें मुश्किल या उलझन भरी भावनाओं से निपटना, लोगों और संसाधनों का सुरक्षा नेटवर्क बनाना, और ज़रूरत पड़ने पर पुलिस या क़ानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

आप अकेली नहीं हैं। आप <number> पर कॉल कर सकती हैं। अगर आप अभी घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, तब भी आप समय-समय पर कॉल करके अपने विकल्पों पर बात कर सकती हैं और किसी ऐसे व्यक्ति से जुड़ सकती हैं जो आपकी स्थिति को समझे।

  • मैं किसी भरोसेमंद दोस्त/पड़ोसी को अपनी स्थिति बता सकती हूँ और उनके साथ योजना बना सकती हूँ। मैं ___________ को अपना कोड/संकेत शब्द रखूँगी ताकि उन्हें पता चल सके कि मुझे मदद चाहिए।
  • मैं एक इमरजेंसी बैग तैयार रख सकती हूँ और उसे ऐसी जगह रख सकती हूँ जहाँ जल्दी पहुँचा जा सके।
  • मैं अपने लिए एक सपोर्ट सिस्टम बना सकती हूँ। जब भी संभव हो, घर से बाहर लोगों और गतिविधियों से जुड़ सकती हूँ।
  • मैं अपने बच्चों के साथ ___________ कोड/संकेत शब्द तय करूँगी ताकि उन्हें पता चले कि उन्हें तुरंत मदद बुलानी है।
  • मैं उनके साथ यह अभ्यास कर सकती हूँ कि इमरजेंसी में कैसे मदद के लिए कॉल करना है और घर छोड़कर सुरक्षित जगह (जैसे पड़ोसी का घर या पास की दुकान) जाना है।
  • मैं सोच सकती हूँ कि घर में कौन-सी जगहें “ज़्यादा सुरक्षित” हो सकती हैं, अगर मेरे बच्चे घर से बाहर न जा पाएँ।
  • मैं अपने बच्चों से कह सकती हूँ कि हिंसा कभी सही नहीं होती — चाहे वह किसी प्रिय इंसान से ही क्यों न हो।और यह उनकी गलती नहीं है। उन्हें यह पता होना चाहिए कि उनकी प्राथमिकता खुद को सुरक्षित रखना है, न कि मुझे बचाना।

हिंसक घटनाओं से हमेशा बचा नहीं जा सकता। मैं इनमें से कुछ तरीक़े अपना सकती हूँ:

  • मैं अपने अनुभव और एहसास पर भरोसा करूँगी। अगर स्थिति बहुत गंभीर लगे तो मैं अपने पार्टनर को शांत करने के लिए उनकी माँग मान लूँगी। मुझे तब तक खुद को सुरक्षित रखना है जब तक ख़तरा टल नहीं जाता।
  • अगर मुझे विवाद या हिंसा की आशंका हो, तो मैं कोशिश करूँगी कि “ज़्यादा सुरक्षित” जगह (जैसे __________) पर चली जाऊँ।
  • अगर मुझे तुरंत घर छोड़ना पड़े, तो पहली जगह जहाँ मैं जाऊँगी वह है __________ (जैसे पास का सार्वजनिक स्थान, पड़ोसी का घर, या पुलिस स्टेशन)। अगर वहाँ न जा सकूँ, तो मैं __________ जाऊँगी।
  • अगर हिंसा टालना मुमकिन न हो, तो मैं ऐसे तरीक़े अपनाऊँगी जिससे चोट कम लगे — जैसे खुद को गोलाकार में समेट लेना या ऐसे कमरे में जाना जहाँ हथियार जैसी चीज़ें न हों।
  • मुझे पता है कि ज़रूरत पड़ने पर कहाँ और कैसे मेडिकल मदद लेनी है।
  • अगर सुरक्षित लगे तो मैं पुलिस को कॉल कर सकती हूँ और शिकायत दर्ज करा सकती हूँ।
  • मैं किसी स्थानीय NGO से संपर्क कर सकती हूँ जो घरेलू हिंसा झेलने वालों की मदद करता है।
  • मैं चोटों, नुक़सान हुई चीज़ों या कपड़ों की तस्वीरें सुरक्षित जगह रख सकती हूँ, ताकि ज़रूरत पड़ने पर पुलिस या क़ानूनी केस में इस्तेमाल हो सकें।