मैं किसी को कैसे बताऊँ कि मुझ पर हिंसा हो रही है?

अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि किस पर भरोसा करें या किससे कहें, तो यह बिल्कुल ठीक है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि जिसको आप बताएं, वो कोई ऐसा हो जिसके साथ आप सुरक्षित महसूस करती हों।

याद रखें, अगर पहली बार जिसको आपने बताया उसने मदद नहीं की, तो आपका आहत महसूस करना स्वाभाविक है। लेकिन इससे रुकिए मत। किसी और से बात करने की कोशिश कीजिए। आप अकेली नहीं हैं और मदद उपलब्ध है।

आप हेल्पलाइन पर गुमनाम रहकर भी मदद ले सकती हैं। अगर आप किसी दोस्त, परिवार के सदस्य या सहकर्मी को बताने का सोच रही हैं, तो तैयार रहें कि उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक भी हो सकती है और नकारात्मक भी। कुछ लोग दयालुता और समझ दिखा सकते हैं, जबकि कुछ असहज हो सकते हैं या आपकी बात को हल्के में ले सकते हैं। उन्हें भी आपकी बात समझने और सोचने में समय लग सकता है। याद रखें, उनकी प्रतिक्रिया आपके सच की परछाई नहीं है। यह भी सोचें कि अगर कोई ग़लत या अनुपयोगी बात कहे, या तुरंत न समझे, तो आप क्या कहना चाहेंगी।

जब आप किसी भरोसेमंद इंसान को चुन लें और खुद को हर तरह की प्रतिक्रिया के लिए तैयार कर लें, तो अपनी सुरक्षा पर भी ध्यान दें। हो सकता है आप दोस्तों और परिवार से अलग-थलग हों, या आपका फ़ोन और मैसेज आपके पार्टनर द्वारा देखे जा रहे हों। ऐसे में आप ये तरीक़े अपना सकती हैं:

  • अगर फ़ोन पर बात करने वाली हैं:
    • ज़रूरी मैसेज या कॉल हिस्ट्री डिलीट करें, अगर आपका पार्टनर फ़ोन देखता है।
    • प्राइवेट या ‘Incognito’ ब्राउज़र विंडो इस्तेमाल करें और अपनी सर्च हिस्ट्री साफ़ करें।
    • किसी भरोसेमंद दोस्त/परिवार के साथ एक संकेत शब्द तय करें। ज़रूरत पड़ने पर उस शब्द/वाक्य को भेजकर उनसे तुरंत मदद मँगवा सकती हैं।
  • अगर फ़ोन तक पहुँच नहीं है:
    • किसी भरोसेमंद पड़ोसी, दोस्त या परिवार के सदस्य से कॉल या मैसेज करने में मदद लें।
    • अगर सुरक्षित हो, तो एक ऐसा फ़ोन रखें जिसके बारे में आपके पार्टनर को न पता हो, और उसे किसी भरोसेमंद व्यक्ति या अपने काम की जगह पर छुपा कर रखें।
  • अगर आमने-सामने बात करने वाली हैं:
    • कोई शांत और निजी जगह चुनें जहाँ बिना रुकावट बात हो सके।
    • इतना समय रखें कि बातचीत जल्दीबाज़ी में न हो।
  • वहीं से शुरू करें जहाँ आप सहज महसूस करती हैं, और उतना ही साझा करें जितना आप चाहती हैं।
  • “मैं” वाले वाक्य इस्तेमाल करें, जैसे: “मुझे असुरक्षित महसूस होता है जब…” या “मैं यह झेल रही हूँ…”
  • अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार रहें — सामने वाला चौंक सकता है, उलझ सकता है या समझ न पाए, यह सामान्य है।
  • ज़रूरत हो तो सीमाएँ तय करें। आप कह सकती हैं: “मैं अभी उस हिस्से पर बात करने के लिए तैयार नहीं हूँ” या “मैं यह इसलिए बता रही हूँ क्योंकि मैं आप पर भरोसा करती हूँ, न कि आपसे कोई कार्रवाई की उम्मीद रखती हूँ।”





अगर आपको शुरुआत करने में मुश्किल हो रही है, तो ये वाक्य मदद कर सकते हैं:

  • “यह मेरे लिए बहुत ज़रूरी है कि जो मैं कहूँ वह हमारे बीच ही रहे। अगर ऐसा संभव नहीं है, तो कृपया पहले बता दें।”
  • “मेरे रिश्ते में कुछ कठिन हो रहा है, जिसके बारे में मैं बात करना चाहती हूँ।”
  • “मुझे लगता है कि मैं हिंसा का सामना कर रही हूँ।”
  • “मैं आपको कुछ बताना चाहती हूँ, लेकिन मुझे सलाह या कार्रवाई नहीं चाहिए, सिर्फ़ आपका साथ चाहिए।”
  • “इस समय मेरे लिए सबसे मददगार होगा ______।” (जैसे सुनना, भावनात्मक सहारा, या व्यावहारिक मदद)।

आपको अलग-अलग भावनाएँ महसूस हो सकती हैं — राहत, डर, थकान, उदासी, या हल्कापन। हिंसा के बारे में बताना बहुत साहस की बात है और भावनात्मक रूप से थका देने वाला भी हो सकता है। अपने साथ नर्मी बरतें।
अगर संभव हो, तो थोड़ा आराम करें या कुछ ऐसा करें जिससे आपको सुकून मिले। आप इन सहायताओं तक भी पहुँच सकती हैं:

  • किसी काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से बात करना
  • खुद का ख्याल रखना: नींद लेना, टहलना, लिखना, पढ़ना, या संगीत सुनना