हर रिश्ता अलग होता है, लेकिन हर रिश्ते में सम्मान और बराबरी होनी चाहिए।
स्वस्थ रिश्तों में मतभेद तो होते हैं, लेकिन उन्हें किस तरह संभाला जाता है, यह सबसे ज़रूरी है। रिश्ता आपसी, सुरक्षित और सम्मानजनक होना चाहिए। आपको कभी डर या चुप कराए जाने जैसा महसूस नहीं होना चाहिए। स्वस्थ रिश्तों में, मतभेद बढ़ने और सीखने का मौक़ा होते हैं, न कि एक-दूसरे को तोड़ने का।
स्वस्थ रिश्ते में, आप और आपका साथी:
अगर आपको चेतावनी संकेत दिखें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें। कभी-कभी साथी कह सकता है कि यह व्यवहार “प्यार” या “परवाह” दिखाने का तरीक़ा है। कई बार इन्हें आपके समाज, धर्म या संस्कृति में सामान्य भी माना जाता है, जिससे इन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है। लेकिन याद रखिए, हिंसा के कई संकेत अलग-अलग परिस्थितियों में मिलते-जुलते होते हैं।
अपने आप से पूछें: क्या आपका साथी…
उलझन महसूस करना ठीक है। जब आपको लगे कि आप तैयार हैं, आप एक सुरक्षा योजना (safety plan) बना सकती हैं, किसी भरोसेमंद इंसान से बात कर सकती हैं, या किसी सहायक सेवा से जुड़ सकती हैं। आपको ऐसे किसी से बात करने का हक़ है, जो बिना जज किए आपकी सुने और आपके विकल्प समझने में मदद करे।
अपने आप से पूछें: क्या मेरा साथी…
अगर आपने इनमें से किसी सवाल का जवाब “हाँ” में दिया है, तो याद रखिए: हिंसा कभी आपकी ग़लती नहीं है।आप अकेली नहीं हैं।सहारा और मदद उपलब्ध है।